28/5/20

Desh Ke Veer Savarkar ji myvillage kunwariya

एक कल्पना कीजिए... तीस वर्ष का पति जेल की सलाखों के भीतर खड़ा है और बाहर उसकी वह युवा पत्नी खड़ी है, जिसका बच्चा हाल ही में मृत हुआ है...
इस बात की पूरी संभावना है कि अब शायद इस जन्म में इन पति-पत्नी की भेंट न हो. ऐसे कठिन समय पर इन दोनों ने क्या बातचीत की होगी. कल्पना मात्र से आप सिहर उठे ना?? जी हाँ!!! मैं बात कर रहा हूँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चमकते सितारे विनायक दामोदर सावरकर की. यह परिस्थिति उनके जीवन में आई थी, जब अंग्रेजों ने उन्हें कालापानी (Andaman Cellular Jail) की कठोरतम सजा के लिए अंडमान जेल भेजने का निर्णय लिया और उनकी पत्नी उनसे मिलने जेल में आईं.
मजबूत ह्रदय वाले वीर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) ने अपनी पत्नी से एक ही बात कही... – “तिनके-तीलियाँ बीनना और बटोरना तथा उससे एक घर बनाकर उसमें बाल-बच्चों का पालन-पोषण करना... यदि इसी को परिवार और कर्तव्य कहते हैं तो ऐसा संसार तो कौए और चिड़िया भी बसाते हैं. अपने घर-परिवार-बच्चों के लिए तो सभी काम करते हैं. मैंने अपने देश को अपना परिवार माना है, इसका गर्व कीजिए. इस दुनिया में कुछ भी बोए बिना कुछ उगता नहीं है. धरती से ज्वार की फसल उगानी हो तो उसके कुछ दानों को जमीन में गड़ना ही होता है. वह बीच जमीन में, खेत में जाकर मिलते हैं तभी अगली ज्वार की फसल आती है. यदि हिन्दुस्तान में अच्छे घर निर्माण करना है तो हमें अपना घर कुर्बान करना चाहिए. कोई न कोई मकान ध्वस्त होकर मिट्टी में न मिलेगा, तब तक नए मकान का नवनिर्माण कैसे होगा...”. कल्पना करो कि हमने अपने ही हाथों अपने घर के चूल्हे फोड़ दिए हैं, अपने घर में आग लगा दी है. परन्तु आज का यही धुआँ कल भारत के प्रत्येक घर से स्वर्ण का धुआँ बनकर निकलेगा. यमुनाबाई, बुरा न मानें, मैंने तुम्हें एक ही जन्म में इतना कष्ट दिया है कि “यही पति मुझे जन्म-जन्मांतर तक मिले” ऐसा कैसे कह सकती हो...” यदि अगला जन्म मिला, तो हमारी भेंट होगी... अन्यथा यहीं से विदा लेता हूँ.... (उन दिनों यही माना जाता था, कि जिसे कालापानी की भयंकर सजा मिली वह वहाँ से जीवित वापस नहीं आएगा).
अब सोचिये, इस भीषण परिस्थिति में मात्र 25-26 वर्ष की उस युवा स्त्री ने अपने पति यानी वीर सावरकर से क्या कहा होगा?? यमुनाबाई (अर्थात भाऊराव चिपलूनकर की पुत्री) धीरे से नीचे बैठीं, और जाली में से अपने हाथ अंदर करके उन्होंने सावरकर के पैरों को स्पर्श किया. उन चरणों की धूल अपने मस्तक पर लगाई. सावरकर भी चौंक गए, अंदर से हिल गए... उन्होंने पूछा.... ये क्या करती हो?? अमर क्रांतिकारी की पत्नी ने कहा... “मैं यह चरण अपनी आँखों में बसा लेना चाहती हूँ, ताकि अगले जन्म में कहीं मुझसे चूक न हो जाए. अपने परिवार का पोषण और चिंता करने वाले मैंने बहुत देखे हैं, लेकिन समूचे भारतवर्ष को अपना परिवार मानने वाला व्यक्ति मेरा पति है... इसमें बुरा मानने वाली बात ही क्या है. यदि आप सत्यवान हैं, तो मैं सावित्री हूँ. मेरी तपस्या में इतना बल है, कि मैं यमराज से आपको वापस छीन लाऊँगी. आप चिंता न करें... अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें... हम इसी स्थान पर आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं...”.
क्या जबरदस्त ताकत है... उस युवावस्था में पति को कालापानी की सजा पर ले जाते समय, कितना हिम्मत भरा वार्तालाप है... सचमुच, क्रान्ति की भावना कुछ स्वर्ग से तय होती है, कुछ संस्कारों से. यह हर किसी को नहीं मिलती.

वीर सावरकर को 50 साल की सजा देकर भी अंग्रेज नहीं मिटा सके, लेकिन कांग्रेस व मार्क्सहवादियों ने उन्हें  मिटाने की पूरी कोशिश की.. 26 फरवरी 1966 को वह इस दुनिया से प्रस्थाान कर गए। लेकिन इससे केवल 56 वर्ष व दो दिन पहले 24 फरवरी 1910 को उन्हें  ब्रिटिश सरकार ने एक नहीं, बल्कि दो-दो जन्मोंो के कारावास की सजा सुनाई थी। उन्हें1 50 वर्ष की सजा सुनाई गई थी। वीर सावरकर भारतीय इतिहास में प्रथम क्रांतिकारी हैं, जिन पर हेग स्थित अंतरराष्ट्री य न्या्यालय में मुकदमा चलाया गया था। उन्हें  काले पानी की सजा मिली। कागज व लेखनी से वंचित कर दिए जाने पर उन्हों ने अंडमान जेल की दीवारों को ही कागज और अपने नाखूनों, कीलों व कांटों को अपना पेन बना लिया था, जिसके कारण वह सच्चा ई दबने से बच गई, जिसे न केवल ब्रिटिश, बल्कि आजादी के बाद तथाकथित इतिहासकारों ने भी दबाने का प्रयास किया। पहले ब्रिटिश ने और बाद में कांग्रेसी-वामपंथी इतिहासकारों ने हमारे इतिहास के साथ जो खिलवाड़ किया, उससे पूरे इतिहास में वीर सावरकर अकेले मुठभेड़ करते नजर आते हैं।
भारत का दुर्भाग्यय देखिए, भारत की युवा पीढ़ी यह तक नहीं जानती कि वीर सावरकर को आखिर दो जन्मों  के कालापानी की सजा क्यों  मिली थी, जबकि हमारे इतिहास की पुस्त कों में तो आजादी की पूरी लड़ाई गांधी-नेहरू के नाम कर दी गई है। तो फिर आपने कभी सोचा कि जब देश को आजाद कराने की पूरी लड़ाई गांधी-नेहरू ने लड़ी तो विनायक दामोदर सावरकर को कालेपानी की सजा क्यों  दी गई। उन्होंलने तो भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और उनके अन्यग क्रांतिकारी साथियों की तरह बम-बंदूक से भी अंग्रेजों पर हमला नहीं किया था तो फिर क्यों  उन्हें  50 वर्ष की सजा सुनाई गई थी।
वीर सावरकर की गलती यह थी कि उन्होंंने कलम उठा लिया था और अंग्रेजों के उस झूठ का पर्दाफाश कर दिया, जिसे दबाए रखने में न केवल अंग्रेजों का, बल्कि केवल गांधी-नेहरू को ही असली स्वजतंत्रता सेनानी मानने वालों का भी भला हो रहा था। अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति को केवल एक सैनिक विद्रोह करार दिया था, जिसे आज तक वामपंथी इतिहासकार ढो रहे हैं। 1857 की क्रांति की सच्चा्ई को दबाने और फिर कभी ऐसी क्रांति उत्पकन्ना न हो इसके लिए ही अंग्रेजों ने अपने एक अधिकारी ए.ओ.हयूम से 1885 में कांग्रेस की स्थांपना करवाई थी। 1857 की क्रांति को कुचलने की जयंती उस वक्तस ब्रिटेन में हर साल मनाई जाती थी और क्रांतिकारी नाना साहब, रानी लक्ष्मीतबाई, तात्याज टोपे आदि को हत्याथरा व उपद्रवी बताया जाता था। 1857 की 50 वीं वर्षगांठ 1907 ईस्वीो में भी ब्रिटेन में विजय दिवस के रूप मे मनाया जा रहा था, जहां वीर सावरकर 1906 में वकालत की पढ़ाई करने के लिए पहुंचे थे।
सावरकर को रानी लक्ष्मीक बाई, नाना साहब, तात्याा टोपे का अपमान करता नाटक इतना चुभ गया कि उन्होंकने उस क्रांति की सच्चासई तक पहुंचने के लिए भारत संबंधी ब्रिटिश दस्ताोवेजों के भंडार 'इंडिया ऑफिस लाइब्रेरी' और 'ब्रिटिश म्यूतजियम लाइब्रेरी' में प्रवेश पा लिया और लगातार डेढ़ वर्ष तक ब्रिटिश दस्ता वेज व लेखन की खाक छानते रहे। उन दस्तारवेजों के खंघालने के बाद उन्हें  पता चला कि 1857 का विद्रोह एक सैनिक विद्रोह नहीं, बल्कि देश का पहला स्वलतंत्रता संग्राम था। इसे उन्हों ने मराठी भाषा में लिखना शुरू किया।
10 मई 1908 को जब फिर से ब्रिटिश 1857 की क्रांति की वर्षगांठ पर लंदन में विजय दिवस मना रहे थे तो वीर सावरकर ने वहां चार पन्ने1 का एक पंपलेट बंटवाया, जिसका शीर्षक था 'ओ मार्टर्स' अर्थात 'ऐ शहीदों'। इपने पंपलेट द्वारा सावरकर ने 1857 को मामूली सैनिक क्रांति बताने वाले अंग्रेजों के उस झूठ से पर्दा हटा दिया, जिसे लगातार 50 वर्षों से जारी रखा गया था। अंग्रेजों की कोशिश थी कि भारतीयों को कभी 1857 की पूरी सच्चारई का पता नहीं चले, अन्यशथा उनमें खुद के लिए गर्व और अंग्रेजों के प्रति घृणा का भाव जग जाएगा।
1910 में सावरकर को लंदन में ही गिरफतार कर लिया गया। सावरकर ने समुद्री सफर से बीच ही भागने की कोशिश की, लेकिन फ्रांस की सीमा में पकड़े गए। इसके कारण उन पर हेग स्थित अंतरराष्ट्रींय अदालत में मुकदमा चला। ब्रिटिश सरकार ने उन पर राष्ट्रअद्रोह का मुकदमा चलाया और कई झूठे आरोप उन पर लाद दिए गए, लेकिन सजा देते वक्तद न्या याधीश ने उनके पंपलेट 'ए शहीदों' का जिक्र भी किया था, जिससे यह साबित होता है कि अंग्रेजों ने उन्हेंन असली सजा उनकी लेखनी के कारण ही दिया था। देशद्रोह के अन्ये आरोप केवल मुकदमे को मजबूत करने के लिए वीर सावरकर पर लादे गए थे।
वीर सावरकर की पुस्ततक '1857 का स्वायतंत्र समर' छपने से पहले की 1909 में प्रतिबंधित कर दी गई। पूरी दुनिया के इतिहास में यह पहली बार था कि कोई पुस्तबक छपने से पहले की बैन कर दी गई हो। पूरी ब्रिटिश खुफिया एजेंसी इसे भारत में पहुंचने से रोकने में जुट गई, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल रही थी। इसका पहला संस्केरण हॉलैंड में छपा और वहां से पेरिस होता हुए भारत पहुंचा। इस पुस्ताक से प्रतिबंध 1947 में हटा, लेकिन 1909 में प्रतिबंधित होने से लेकर 1947 में भारत की आजादी मिलने तक अधिकांश भाषाओं में इस पुस्तुक के इतने गुप्ते संस्कदरण निकले कि अंग्रेज थर्रा उठे।
भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, पूरा यूरोप अचानक से इस पुस्ताकों के गुप्त, संस्कंरण से जैसे पट गया। एक फ्रांसीसी पत्रकार ई.पिरियोन ने लिखा, ''यह एक महाकाव्यक है, दैवी मंत्रोच्चांर है, देशभक्ति का दिशाबोध है। यह पुस्त क हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देती है, क्योंचकि महमूद गजनवी के बाद 1857 में ही हिंदुओं और मुसलमानों ने मिलकर समान शत्रु के विरुद्ध युद्ध लड़ा। यह सही अर्थों में राष्ट्रीाय क्रांति थी। इसने सिद्ध कर दिया कि यूरोप के महान राष्ट्रोंद के समान भारत भी राष्ट्रीरय चेतना प्रकट कर सकता है।''
आपको आश्च र्य होगा कि इस पुस्त क पर लेखक का नाम नहीं था..।

27/5/20

रामेश्वर जी साहू द्वारा मन की बात my villege kunwariya

मन की बात
# *मेरा गाँव* 
आज सुबह-सुबह  फेसबुक देख रहा था  फेसबुक पर एक फोटो  दिखा  फोटो को देख कर मन में  बड़ी दुखद वेदना हुई और मन में  कुछ आया क्या आज मैं  क्यों न बंटवारे पर मन की बात लिखूं 
ये जो तस्वीर है वो दो भाइयों के बीच बंटवारे के बाद बने घर की तस्वीर है। 

*बाप-दादा* के घर की देहलीज को जिस तरह बांटा गया है, वह समाज के हर गांव-घर की असलियत को भी दर्शाता है।

*दरअसल* हम *गांव* के लोग अब जितने खुशहाल दिखते हैं उतने हैं नहीं।

*जमीनों* के रास्ते  के केस, पानी के केस, खेत-मेढ के केस, रास्ते के केस, मुआवजे के केस, ब्याह शादी के झगड़े, दीवार के केस, नालियों की खटपट आपसी मनमुटाव, चुनावी रंजिशों ने समाज को खोखला कर दिया है।
अब गांव वो नहीं रहे 
 जब, बस में गांव की महिला सवारी को देखते ही सीट खाली कर देते थे बच्चे क्या जवान। 
दो चार थप्पड गलती करने पर किसी बुजुर्ग या बाबोसा काकोसा बाबा दाजी   या पड़ोसी ने लगा दिए तो इश्यू नहीं बनता था अब। थप्पड़ दे बदले में सामने वाला लठ लेकर आ जाए

   अब हम पूरी तरह बंटे हुए लोग हैं। गांव में अब एक दूसरे के उपलब्धियों का सम्मान करने वाले, प्यार से सिर पर हाथ रखने वाले लोग संभवत अब मिलने मुश्किल हैं। 
हालात इस कदर खराब है कि अगर पडोसी फलां व्यक्ति को वोट देगा तो हम नहीं देंगे।
इतनी नफरत कहां से आई है समाज के लोगों में ये सोचने और चिंतन का विषय है।
कितने झगडे होते हैं और कितने केस अदालतों व संवैधानिक संस्थाओं में लंबित है इसकी कल्पना भी भयावह है। 

संयुक्त परिवार अब गांवों में एक आध ही हैं, जहां पर भी है वहां पर भी विघटन की कगार पर है छाछ-दूध जगह वहां भी पेप्सी कोका पिलाई जाने लगी है।

हमारा समाज भी बंटा है और शायद अब हम भरपाई की सीमाओ से भी अब बहुत दूर आ गए हैं। अब तो वक्त ही तय करेगा कि हम और कितना बंटेंगे और गिरेंगे !
रामेश्वर साहू कुंवारिया राजसमंद

23/5/20

युवक ने खून देकर बचाई आदमी की जान बचाई, पेश की मानवता की मिसाल my village kunwariya

जहां लोग धर्म-जाति के नाम पर एक दूसरे के जानी दुशमन बन जाते है। एक दूसरे की जान लेने पर आमादा हो जाते है। उनके लिए एक युवक ने मानवता के रूप में पेश आया है जो कि अपना खून देकर एक  आदमी की जान बचाई है

22/5/20

यादव समाज द्वारा कुंवारिया में मास्क वितरण किए my villege kunwariya



 यादव समाज द्वारा आज यादव मोहल्ला कुंवारिया में मास्क वितरण किये गये व सभी को कोविड 19 के संक्रमण से जिवन बचाने लिये युवाओं ने इस महामारी से जंग जतने के लिये हस सभंव मदद का आश्वासन दिया

रामेश्वर जी साहू द्वारा एक और मन की बातmy village kunwariya

*मन की बात*
 एक समय था जब लोग जमीन पर काम करके नेता बनते थे और जनता भी उनकी बात सुनती थी।अब तो *जन्मदिन* और वैवाहिक सालगिरह की बधाइयां दे के कहीं छोटा-मोटा पुण्य  10 ₹5 का खर्चा चाय पानी के लिए पुण्य किया हो तो फोटो सहित डाल कर नेता बना जा रहा है। कुछ तो ऐसे युवा ह्रदय सम्राट बने पड़े है की ₹5 रुपए की ईकलाई जेब में रखकर हर कहीं हर किसी को जन्मदिन की बधाई उनको बधाइयां देने के अलावा कुछ नहीं आता, विचारधारा कैसे आगे बढ़ाना है विपक्ष को कैसे घेरना है ,
*राष्ट्रविरोधियों* को कैसे जनता के सामने बेनकाब  करना भविष्य मैं इस पर किसी प्रकार का चिंतन मनन नहीं करते। 
बस जन्मदिन,सालगिरह की बधाइयां दे दे कर ही लोग नेता बनने लगे है !
क्यो की सबसे आसान और बिना मेहनत और बिना रिस्क का तरीका है,
बस बड़े भैया को बधाई, दादा को शुभकामना,ये सम्राट वो सम्राट साला नई पीढ़ी की पूरी राजनीति इसी पर टिकी नजर आती है, 
*सामाजिक* मुद्दों पर चिंतन मनन विचारधारा, सामाजिक सरोकार सब खत्म बस भैया ,बड़े भैया जिगरी जिगर के टुकड़े लल सा कुलसा मनसा बॉस ,दादा,फलाना ढिकाना को बधाई बधाई ,शादी की बधाई,बच्चे पैदा होने की बधाई ,बाकी राजनीतिक दल तो जन्म से ही चरण चंपू है वो तो है ही *चरणचंप्पू* पर बीजेपी के नए नेताओ में भी ये संक्रमण धीरे धीरे फेल रहा है,
*बधाई* देना गलत नही है देना ही चाहिए पर सिर्फ बधाई बधाई और बाकी मुद्दों पर कोई ज्ञान कोई विचार नही ये गलत है। बधाइयों के साथ *विचारधारा* और मुद्दों पर भी सक्रिय रहना चाहिये पार्टी के बड़े नेता बनकर घूम रहे हैं लोगों को पूछ लिया जाए कि आपके पार्टी का इतिहास  तो इधर-उधर झांकने लग जाते हैं और जमीन पर या सोशल मिडिया पर विचारधारा और मुद्दों पर गंदी गालियां लिख कर नेता बनने जा रहे हैं
 चिंतन मंथन करना चाहिये ,इससे आपका *वैचारिक* स्तर भी बढ़ेगा और समाज आपके विचारों से अवगत भी हो सकेगा।
    पोस्ट अन्यथा में न ले ये आप लोगो के भले के लिए है।
*रामेश्वर साहू* कुंवारिया राजसमंद

कुंवारिया में लॉकडाउन के दौरान गुटखा बेचने वाले कुंवारिया युवक ने बदला अपना व्यवसाय, खोला पतंजलि का स्टोर my village kunwariya

पतंजलि के अनुसार इसके सभी उत्पाद प्राकृतिक व आयुर्वेदिक घटकों से बने होते हैं जैसे:
  • घी
  • च्यवनप्राश
  • केश कांति व अन्य सौंदर्य प्रसाधन
  • शहद
  • आयुर्वेदिक औषधियाँ
  • घृतकुमारी का रस
  • आंवला का रस, चूर्ण व गोलियाँ
  • पतंजलि आटा नूडल्स- हालांकि लॉंच होने के साथ पतंजलि आटा नूडल्स एक विवाद से भी घिरी गई।

21/5/20

रामेश्वरजी साहू द्वारा मन की बातmy village kunwariya

*इतिहास की बात*
 21 मई 1991 रात 10:30 बजे लोकसभा चुनाव प्रचार के तहत भारतीय जनता पार्टी अनेक कार्यकर्ता शंकर लाल जी तातेड़ ,सोहन लाल जी पीपाड़ा ,नाथू लाल जी जीनगर ,गणेश जी कच्छारा ,वरद पुरी जी गोस्वामी; हिम्मत लाल जी  पीपाड़ा; हरक लाल जी पीपाड़ा ,पृथ्वीराज जी जाट,.  विजय प्रकाश जी ओस्तवाल, कैलाश जी काबरा, सुशील जी संचेती, चंद्रेश जी पीपाड़ा, जगदीश जी साहू, जैसे अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता थे  पर छोटे कार्यकर्ता होने के नाते मैं और भाजपा कार्यकर्ता नंदू पुरी गोस्वामी पोस्टर लगा रहे थे जब हम पोस्टर झंडीया  लगाकर 11:00 बजे घर पहुंचे तो उस समय एकमात्र टीवी चैनल  *दूरदर्शन* ही हुआ करता था मेरे घर पर भी एक छोटी ब्लैक एंड वाइट टीवी थी घर पहुंच कर टीवी को चालू किया उस समय रात 11:00 बजे अंतिम समाचार आते थे और उसके बाद दूरदर्शन बंद हो जाता था जैसे ही मैंने टीवी को ऑन किया समाचार आ रहे थे 
*राजीव जी गांधी* की बम विस्फोट में हत्या और चुनाव निरस्त हुए संचार का माध्यम उस समय बहुत कम था सो हमने भी टीवी पर सुनकर सो गए दूसरे दिन जब 6:00 में उठा तो सबसे पहले मैंने जानकारी उस समय  एवं वर्तमान कांग्रेस कार्यकर्ता *गिरीश जी दाधीच* को सर्वप्रथम मैंने बताई और कहा कि चुनाव सब कैंसिल हो गए हैं उन्होंने कहा ऐसा कैसे हो गया मैंने कहा  बम विस्फोट में रात को समाचार देख रहा था उसमें आया है 
22 मई को 
*तैलिक साहू* समाज का प्रथम सामूहिक सम्मेलन था उदयपुर में उसको जैसे तैसे वैवाहिक कार्यक्रम को पूरा किया दूल्हा  दुल्हन की बिंदोली भी नहीं निकाल सके क्योंकि 22 तारीख को सभी दुकानें बंद हो गई थी और एक तरह से जैसे कर्फ्यू लग गया था और लोकसभा के चुनाव कैंसिल हो गए थे उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति लहर चली और भारतीय जनता पार्टी एवं गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा 
राजीव जी की हत्या के पूर्व जो लोकसभा सीटों के चुनाव हुए उन्हें में 60 परसेंट सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीती !
21 तारीख को हत्या के बाद हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को झटका लगा और सहानुभूति लहर कांग्रेस के पक्ष में हो गई और भारतीय जनता पार्टी हार गई 
और कांग्रेस सत्ता में आई कांग्रेस के पी वी नरसिम्हा राव भारत के प्रधानमंत्री बने... ...21 मई को आज हम फिर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं..   *रामेश्वर साहू* एक भाजपा कार्यकर्ता कुंवारिया

20/5/20

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Rajsamand
राजसमंद में करोना का कहर जारी

आज फिर राजसमंद जिले में हुआ कोरोना Blast..9 नए Positive केस आये. अब जिले में कुल 62 केस हो गए है.

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किसानों की हालत खराब
अब राजसमंद में घुस चुका है। आपको बता दें कि पाली से होकर टिड्डियों का दल राजसमंद घुस गया। यहां पर देसुरी के घाटा से होकर लाम्बोड़ी, आइडाणा होते हुए राजसमंद के आमेट उपखंड के पर्वती और आगरिया की ओर मुड़ गया। यहां से कोटड़ी, पर्वती,वणवेरिया, शान्ति नाथ में अपना डेरा डाल कर किसानों की परेशानी बड़ा दी। टिड्डियों ने आगरिया और पर्वती में ही डेरा डाल दिया। इस पर मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अमले ने स्प्रे किया। हालांकि अभी बड़ी मात्रा में टिड्डियां बबूल के पेड़ों पर तथा पहाड़ों पर बैठी हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि अभी खेत खाली पड़े हैं।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर भूपेंद्रसिंह राठौड़ ने बताया कि पाली से टिड्डियों का दल राजसमंद में घुसा। इस दौरान दल दो गुटों में बंट गया, एक गुट भीम, जस्सा खेड़ा होते हुए भीलवाड़ा जिले में प्रवेश कर गया। इससे जिले में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। जबकि दूसरा दल देसूरी से होते हुए पर्वती और आगरिया की ओर आ गया। यहां आगरिया में ही दल ने यहीं डेरा डाल दिया। इस पर मौके पर पहुंची प्रशासनिक और कृषि विभाग की टीम ने स्प्रे मशीनों तथा फायर ब्रिगेड से टिड्डियों पर कीट नाशक का छिड़काव किया। ऐसे में कुछ टिड्डियों का दल ऊंचे पेड़ों और पहाड़ों पर चला गया, जिससे उस पर स्प्रे नहीं हो सका।

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RSS helped poor families in Kunwaria
 Workers of the Rashtriya Swayamsevak Sangh are also active in assisting the needy people in the ongoing lockdown due to Corona virus infection.  Sangh workers in Kunwaria distributed masks to over 150 families so far.
कुंवारिया में RSS ने गरीब परिवारों को पहुंचाई सहायता
 कोरोनावायरस संक्रमण के कारण होने वाली लॅकडाउन में ज़रूरतमंद लोगों को सहायता पहुंचाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता भी सक्रिय हैं।  कुंवारिया में संघ के कार्यकर्ता अब तक 150 से ऊपर परिवारों को मास्क बाँटे।

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The tea looks very good for making tea with the art of the hand.
हाथ की कला से मिट्टी के कुल्हड़ बनाते हुए चाय के लिए इस मे चाय बहुत ही अछी लगती है

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The Charbhuja temple looks very good during the evening.
चारभुजा मंदिर संध्या के समय बहुत ही अच्छा दिखता है।

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Different types of games are played here.
कुंवारिया खेल मैदान यहाँ पर तरह तरह के खेल खेले जाते हैं।

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This is what it looks like at the Kunwaria fort evening.
कुंवारिया गढ़ संध्या के समय ऐसा दिखता है।

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Kunwaria  Vegetable Market, Jewelery, Market, Market Cloth, Market.

कुंवारिया मार्केट सब्जी मंडी, ज्वेलरी, बाजार, मार्केट क्लॉथ, मार्केट।

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Kunwaria Four Line 758 National Highway
कुंवारिया फोर लाइन 758 नेशनल हाईवे।

19/5/20

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Kunwaria has a gaushala by the name of Shri Ram Gaushala in which 300 400 Gau Mata reside and its food and drink is arranged by Shri Kishan Ji Nayak.
कुंवरिया में श्रीराम गौशाला के नाम से एक गौशाला है जिसमें 300 400 गौ माता की निवास करती हैं और उसके खाने-पीने की व्यवस्था श्री किशन जी के दुवारा की जाती है

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Seeing this pict
ure, all of us should sacrifice death.
यह चित्र देखकर हम सभी को मृत्यु भोज का त्याग करना चाहिए।

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Holika Dahan takes place vigorously in Kunwaria.  All the villagers come with drums and worship Holika
कुंवारिया में होलिका खंड जोरदार से होता है।  सभी ग्रामवासी ढोल नगाड़ों के साथ होलिका की पूजा करके आते हैं

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From the current sari center, the charm of Kunwariya remains.  Textile market
वर्तमान साड़ी केंद्र से कुंवारिया की रौनक बनी हुई है।  कपड़ा बाजार
The current sari center attracts people from far and wide from Kunwaria to buy clothes.
वर्तमान साड़ी केंद्र में कपड़ा खरीदने के लिए कुंवारिया से दूर-दूर से लोग आते हैं।

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Due to the Kunwaria Police Station, incidents in Kunwaria and surrounding areas are always less
कुंवरिया पुलिस थाना की वजह से कुंवारिया व आसपास के इलाकों में वारदाते हमेशा कम होती है

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गणपति महोत्सव कुँवरिया जोदार
Ganpati Festival Kunwariya strongly

Kunwariyanews


 कुंवारिया में पतंजलि का शुभारंभ पतंजलिि प्रोडक्ट स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ

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There is an old hotel in our village known as Mittu Baqi Hotel.
हमारे गांव में एक पुराना होटल है जिसका नाम मिट्ठू बाकी होटल के नाम से जाना जाता है।

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The Time Door of King Maharaja, which is called Ravali Pol
राजा महाराजा की टाइम का दरवाजा जिस पर रावली पोल बोलते हैं

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हमारे गांव में बहुत ही पुराना पशुमेला लगता है  जो जोहीडा भेरुजी के नाम से प्रसिद्ध मेला लगता है  यहा पर दूर दूर से लोग खरीदने के लिये ओर  लोग यहां सबसे ज्यादा पशु खरीदने आते है

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Fruit fruit shops decorate our village.
फल फ्रूट की दुकानों सजती हमारे गांव में है।

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There is a very old railway station in our village, from Mavli to Marwar train
हमरे गाँव में बहूत पुराण रेलवे स्टेशन है जो मवाली से मारवाड़ रेल गाडी

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Bhilwara Road, Rupa Kheda, Toll, Plaza, NH 758.
भीलवाड़ा रोड, रूपा खेड़ा, टोल, प्लाजा, एनएच 758

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Ramdevra maintains food for those who go on foot.
The temple of Ramdev ji, the famous folk god of Rajasthan!
Folk god famous Ramdev ji also rides