
वहीं दूसरी तरफ हमारे हिंदुस्तान की आत्मविश्वास से परिपूर्ण 50 प्रतिशत गृहणियां आगामी 2021 वाले पूरे साल के लिए केरियो (कच्चे आम)का #आचार बना कर रख रही है।
प्रतिशत वही है बस अंतर केवल सोच और विश्वास का है निराशा कष्ट और दुखो में भी जो आशावान रहे वही हिंदुस्तान है।
यही अंतर होता है आशावादी और निराशावादी जीवन में
हिंदुस्तानी संस्कृति हमें आशा और विश्वास के साथ जीना सिखाती है।
हमारा हिंदुस्तानी जनमानस अपने आशावादी विश्वास युक्त चिंतन के कारण विश्व की अन्य संस्कृतियो से श्रेष्ठ है
पूरा विश्व जीवन मेंआशा की किरण खो सकता है पर हिंदुस्तान की भूमि पर आशा का सूर्य सदैव चमकता रहता है हिंदुस्तान आपदा विपदा के खेल से आगे बढ़ कर जीवन जीने की कला में निपुणता रखता है।
शायद इसी भाव से अटल बिहारी वाजपेई जी ने कहा था कि हिंदुस्तान की पावन धरा का बूंद-बूंद जल गंगाजल और हर एक कंकड़ शंकर है जो यहां के जनमानस के जीवन में सतत आशा के भाव पैदा करता है ।
गिरिराज कुमार काबरा
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