21/6/20

मुगफली ओर रामेश्वर जी साहू my village kunwariya

चार दिन पहले उदयपुर जाते समय  एक मूंगफली का पैकेट लिया। जब मैंने इस मूंगफली के पैकेट को देखा इसमें मुझे दो भाषाएं नजर आई। जिसमें एक इंग्लिश भाषा थी जो कि आमतौर पर चली आ रही है। और दूसरी उर्दू अब मुझे यह समझ में नहीं आया की यह कंपनी नहीं ब्रिटेन में है और ना ही सऊदी अरेबिया में है। हिंदी का नामोनिशान ही नहीं। इसमें पता हमारे देश की राजधानी का था। मैंने इस कंपनी को फोन लगाया कि और पूछा भाई  आपकी कंपनी किस देश में है। और वहां से मेरे को जवाब मिला की पॉकेट के बाहर पता लिखा हुआ है। मैंने उसको बोला तभी तो पूछ रहा हूं कि आपकी कंपनी किस देश में है। फिर मैं उसको बोला आपकी कंपनी हमारे भारत देश में है दिल्ली का पता इसमें आपने लिखा है। और भाषा का प्रयोग दूसरे देशों का कर रहे हो। यह कंपनी वाला मुझे बोलता है इसकी बात सरकार से करिए। मैंने इसको जवाब दिया कि तुम्हारी कंपनी क्या सरकार चलाती है। जैसे ही मैंने इसको यह जवाब दिया इसने अपना फोन काट दिया और स्विच ऑफ कर दिया। मैं आप सभी लोगों से यह बात इसलिए बोल रहा हूं। आखिर यह कहीं धीरे-धीरे भाषा जिहाद तो नहीं है। हमारे देश में बिकने वाला प्रोडक्ट हमारे देश की भाषा में होना चाहिए। जय हिंद जय श्री राम।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें